Zindgi Aur Maut Ki Kitab : Ek Tanha Shayar
Zindgi aur Maut Ki Kitab : Ek Tanha Shayar
मेरे दिल की ये किताब है,
पूरे ना सही अधूरे अल्फाज़ है,
कोई नहीं है अपना ईस ज़माने में,
जींदगी महज मौत का फ़रमान है,
ना करना तमाशा मेरी मोत का जनाजे से,
कफ़न हो जाए नसीब बस यही आस है,
हर घडी ले जा रही है मोत की तरफ हमे,
वक्त के सामने हमारी क्या औकात है,
काश-काश सुन ले खुदा गुजारीश हमारी,
चारो तरफ है अंधेरा और खुदा की आस है
Written By Shubham Dave
2)
जींदगी महज यादों की कहानी थी,
हाँ, वही-वही मेरी जींदगानी थी,
कलम भी वही थी और वही किताब थी,
मे कहानी और मेरी वो जुबानी थी,
में हिंदु था और थी वो मुसलमान,
में प्रार्थना और वो नमाज़ की दिवानी थी,
मेरा ठिकाना मंदिर ओर था उसका मस्जिद,
मुजे मंत्र ओर अज़ान उसको प्यारी थी,
में कोरा कागज़ था ओर थी वो कलम-ए-स्याही,
में सफ़ेद और वो काफी रंगो की मोहताज थी,
में कंटक था ओर थी वो फूल गुलाब का,
में चुभता लोगो को ओर वो सबके मनको भाती थी,
में आशिक था ओर वो रुह आशिको की,
अब और क्या कहुं यारों,
ये तो हिंदु-मुस्लिम की कहानी थी
Written By Shubham Dave



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